झूठी प्रतिष्ठा के चक्कर में दम तोड़ती भारतीय युवाओं की प्रतिभा


डॉक्टर आशीष का सिविल लाइन, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में क्लीनिक है, प्रैक्टिस भी अच्छी है और महीने में 3-4  लाख रू की आय हो जाती है लेकिन उन्हें हमेशा अपने बैचमेट डाक्टर कबीर की तरह बड़ा अस्पताल न बना पाने का अफ़सोस रहता है।

शादी के दस साल बाद  दो बेटियों के बाद बेटा पैदा हुआ तो घर में खुशियाँ मनायी गयी, डॉक्टर साहब तो बेटे के पैदा होते ही अपनी पत्नी का धन्यवाद करते हुए बोले इसे डॉक्टर कबीर से भी बड़ा डॉक्टर बनाऊंगा।

लो बेटा पैदा होते ही शुरू हो गयी रेस “माँ-बाप के सपनों का दबाव, दुनिया की गलाकाट प्रतिस्पर्धा, दूसरों के जैसे बनने की चाहत, फलाँ का बेटा ऐसा है …”।

Pressure of False reputation is killing young talentsource

एक बात समझ में नहीं आयी, डॉक्टर साहब मेडिकल साइंस के छात्र थे उन्हें पता था कि हर इंसान अपने आप में जेनेटिक बनावट से लेकर व्यवहार तक सब कुछ खास होती है लेकिन उसे समझे बिना बड़ा डॉक्टर बनाने का निर्णय उनके न खत्म होने वाले सपने की उड़ान का हिस्सा था या पढ़ लिखकर भी   नासमझी वाली सोच का हिस्सा। पता नहीं….??

सपनों के बोझ तले डॉक्टर साहब उसकी परवरिश भी अपने बचपन से तुलना करके शुरू कर दिया, अक्सर पत्नी से लड़ाई होती की तुम्हे क्या पता डॉक्टर बनने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है। तुम्ही में बिगाड़ रखा है नही तो क्लास मे तीसरी पोजीशन की जगह पहली …

सुबह-सुबह आधी नींद में स्कूल बस पकड़ना, शाम को ट्यूशन, रात की पढ़ाई। आधे घंटे टीवी के अलावा उसके पास समय ही नही था। रही सही कसर डॉक्टर साहब के पिता जी, रिटायर्ड आर्मी आफीसर ने पूरा कर दिया जीवन में अनुशासन का महत्त्व.

Pressure of False reputation is killing young talentsource

क्या लड़कियों की तरह रो रहा है, बहनों के साथ ज्यादा बोलने नहीं देते, मर्द बनो मर्द …

उसकी अपनी प्रतिभा क्या थी, इच्छा क्या थी किसी ने न तो पूछा, न तो विकसित होने का मौका दिया। बचपन कब गुजर गया पता ही नहीं चला। बड़ी दीदी की शादी हो चुकी, छोटी दीदी अभी  मेडिकल कालेज में थी लेकिन उनके साथ खुलकर हसने, बात करने, बताने का मौका ही नहीं मिला की चाहता क्या है? काबिल होने के बाद भी बेटियों को कभी भी बेटे जैसा सम्मान नही मिला ….

Pressure of False reputation is killing young talentsource

कोटा में पाँच साल PMT की तैयारी करने के बाद जब सेलेक्सन नही हुआ तो घर वालों के ताने न सुनना पड़े इस वजह से वह घर जाने में डरने लगा, डॉक्टर साहब को एक बार लगा किसी प्राइवेट कॉलेज से MBBS करवा दे पर डॉक्टर कबीर जैसा बनाने की इच्छा ने रोक लिया डिग्री तो होगी लेकिन …

Pressure of False reputation is killing young talentsource

कोटा से उसे वापस घर बुला लिया गया। अनुशासन, मर्दानगी ढेरों तानों के बीच उसने अपना ग्रेजुएशन पूरा किया लेकिन नए सपनों के साथ अब IAS/PCS …

दादा-दादी की इच्छानुसार उसकी शादी बैंक में कार्यरत लड़की से कर दी गयी। दोनों काफी खुश थे, लेकिन सिविल सेवा में दो प्रयास में सेलेक्शन न होने की वजह से एक नया ताना “बीबी की कमाई खाने वाला” ने उसकी खुशियों को चूर-चूर कर दिया। बहू ने कई बार कहा कुछ बिजनेस करवा दीजिये लेकिन वह तो घर वालों की प्रतिष्ठा के खिलाफ था, हमारा बेटा करेगा तो सिर्फ सरकारी नौकरी …

घरवालों के सपने, अनुशासन, प्रतिष्ठा, मर्दानगी के चलते न  तो वह खुल के कभी रो सका, न ही अपनी बीबी से अपनी परेशानी, द्वन्द, दुःख को कह सके। अंदर ही अंदर वह महीनों से घुटता रहा । समाज द्वारा निर्धारित मापदण्डों के अनुसार वह  अच्छा पुरुष न बन पाने का दबाव  झेल न सका, नही तो आज उसकी लाश पंखे से न लटक रही होती।

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